एक समय की बात है, एक सेठ जी बहुत ही दयालु और धर्म-कर्म में विश्वास रखने वाले व्यक्ति थे। उनके पास जो भी उधार मांगने आता, वे उसे कभी मना नहीं करते थे।
सेठ जी अपने मुनीम को बुलाते और उधार लेने वाले से एक ही सवाल पूछते—
“भाई, तुम यह कर्ज़ इस जन्म में चुकाओगे या अगले जन्म में?”
जो लोग ईमानदार होते, वे कहते—
“सेठ जी, हम इसी जन्म में आपका कर्ज़ चुका देंगे।”
लेकिन कुछ चालाक और बेईमान लोग हँसते हुए कहते—
“सेठ जी, हम आपका कर्ज़ अगले जन्म में उतारेंगे।”
और मन ही मन सोचते कि कितना भोला है यह सेठ, जो अगले जन्म तक की उम्मीद लगाए बैठा है।
मुनीम भी बिना कुछ पूछे, जैसा कहा जाता वैसा ही बही-खाते में लिख लेता।
एक दिन एक चोर भी सेठ जी के पास पहुँचा। उसका इरादा उधार लेने से ज्यादा सेठ की तिजोरी देखने का था। उसने भी पैसे मांगे और कहा कि वह कर्ज़ अगले जन्म में लौटाएगा।
रात को वह चोरी करने के इरादे से सेठ के घर पहुँचा और तबेले में छिप गया। तभी उसने देखा कि भैंसें आपस में बात कर रही हैं—और आश्चर्य की बात, वह उनकी भाषा समझ पा रहा था।
एक भैंस ने दूसरी से पूछा—
“बहन, तुम नई आई हो?”
दूसरी बोली—
“हाँ, मैं पिछले जन्म का कर्ज़ चुकाने आई हूँ। और तुम?”
पहली भैंस बोली—
“मुझे यहाँ तीन साल हो गए हैं। मैंने सेठ जी से कर्ज़ लिया था और अगले जन्म में लौटाने को कहा था। अब भैंस बनकर दूध देकर वह कर्ज़ चुका रही हूँ।”
यह सुनकर चोर के होश उड़ गए। उसे समझ आ गया कि कर्ज़ से कोई नहीं बच सकता—चाहे इस जन्म में चुकाओ या अगले जन्म में, हिसाब तो देना ही पड़ेगा।
वह तुरंत सेठ के पास गया, अपना लिया हुआ कर्ज़ लौटाया और अपना नाम बही से कटवा दिया।
🌼 सीख (Moral)
हम सब इस संसार में किसी न किसी लेन-देन (कर्मों के हिसाब) को पूरा करने आते हैं।
कोई बेटा बनकर आता है, कोई बेटी,
कोई माता-पिता, कोई पति-पत्नी,
कोई मित्र, तो कोई शत्रु बनकर।
चाहे सुख हो या दुःख—हर रिश्ता एक कर्मों का हिसाब है, जिसे हमें पूरा करना ही होता है।
यह प्रकृति का अटल नियम है।
इसलिए अपने कर्मों को सुधारें, सच्चाई और भक्ति के मार्ग पर चलें, और अपनी जीवन यात्रा को सफल बनाएं।