HomeLife Philosophyनन्ही गुनगुन और उसकी नानी की एक प्यारी कथा

नन्ही गुनगुन और उसकी नानी की एक प्यारी कथा

बहुत समय पहले, एक शांतसे गाँव में
एक नन्हीसी लड़की रहती थी।
सब उसे प्यार से गुनगुन बुलाते थे,
क्योंकि उसकी हँसी किसी मीठे गीत की तरह लगती थी।

गुनगुन सिर्फ चार साल की थी
जब उसकी माँ तारों के देश में चली गई।
उस दिन से उसकी नानी ने
उसे अपनी गोद में उठा कर कहा
चिंता मत कर, मेरी बच्ची
अब मैं ही तेरी माँ भी हूँ और नानी भी।

गुनगुन की तीन बहनें और दो भाई थे,
और उन सबकी नानी सबके लिए
एक हीसी ममता रखती थीं।

गाँव का मीठा जीवन

गुनगुन का गाँव बहुत प्यारा था
बिजली थी, घड़ी,
फिर भी सबके चेहरों पर मुस्कान रहती।

सुबह पक्षियों की चहचहाहट
और मोर की पुकार से होती।
दोपहर को मिट्टी की खुशबू
मन को खुश कर देती।
शाम होते ही
औरतें दरी बिछाकर
गीत गातीं, हँसी बाँटतीं।

गुनगुन की नानी कढ़ाईबुनाई करतीं,
रंगबिरंगी दरियाँ और गलीचे बुनतीं।
गुनगुन पास बैठकर देखती और खुश होती
नानी, ये फूल कैसे बने?”
नानी हँसकर कहतीं
प्यार से, मेरे लालसब कुछ प्यार से।

गाय-भैंस और घर का आनंद

घर में गायभैंस भी थीं।
नानी उनके लिए
चने और जौ कूटकर चारा बनातीं।
गुनगुन को यह देखना बहुत अच्छा लगता।

खाना हमेशा मिट्टी के बर्तन में बनता,
उपलों की आँच पर पकता,
और उसकी खुशबू
पूरा घर महका देती।

गुनगुन का जन्म-रहस्य

एक दिन नानी ने गुनगुन को गोद में लिया और कहा
तुझे पता है, तू मंगलवार के दिन पैदा हुई थी।

गुनगुन ने गोलगोल आँखें बना कर पूछा,
तो क्या हुआ?”

नानी ने उसकी नन्ही नाक को छूकर कहा
कुछ लोग कहते थे कि
मंगलवार को जन्म लेना अच्छा नहीं होता
पर तेरी माँ ने कहा
मेरी बच्ची अमंगल कैसे हो सकती है?
यह तो मेरे जीवन की मंगलघड़ी है!

और उन्होंने तुझे अपने सीने से लगा लिया।

गुनगुन मुस्कुराई और माँ की याद में
अपनी हथेली अपने दिल पर रख ली।

कथा का मीठा सार

गाँव में भले ही सड़कें नहीं थीं,
घड़ियाँ नहीं थीं,
पर वहाँ बहुत कुछ था
प्यार, हँसी,
साधारण जीवन की मिठास,
और एक माँ का अटूट विश्वास।

गुनगुन ने समझ लिया कि
दुनिया में सबसे बड़ी शक्ति
माँ का प्यार होता है।

और वह हर रात सोने से पहले
तारों को देखती और कहती
धन्यवाद माँ…आपने मुझे इस दुनिया में रहने दिया।

शेष कल:-

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